‘रासायनिक खेती से बढ़ रहीं गंभीर बीमारियां’, कृषि अधिकारी बोले- कम से कम एक बीघा भूमि से शुरू करें जैविक खेती
‘रासायनिक खेती से बढ़ रहीं गंभीर बीमारियां’, कृषि अधिकारी बोले- कम से कम एक बीघा भूमि से शुरू करें जैविक खेती
दौसा जिले में आयोजित किसान जागरूकता कार्यक्रम में कृषि अधिकारियों ने किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं।
कृषि अधिकारी ने कहा कि रासायनिक खेती से तैयार होने वाली फसलों के सेवन से विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में किसानों को धीरे-धीरे जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे शुरुआत में कम से कम एक बीघा भूमि पर जैविक खेती का प्रयोग करें और उसके परिणामों का मूल्यांकन करें।
कार्यक्रम में जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, बीजामृत तथा अन्य प्राकृतिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जैविक खेती से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है, उत्पादन लागत कम होती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में जैविक उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी रहती है। किसानों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का सुझाव दिया गया।
कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने भी जैविक खेती से जुड़े अपने अनुभव साझा किए और कृषि विभाग की ओर से उपलब्ध योजनाओं एवं तकनीकी सहायता की जानकारी प्राप्त की। अधिकारियों ने किसानों को स्वस्थ समाज और सुरक्षित भविष्य के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

