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कच्चा तेल ईरान युद्ध से पहले के स्तर पर लौटा: 72 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा भाव, पेट्रोल-डीजल में राहत दशहरे तक संभव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर ईरान युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आई हैं।

वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में तनाव कम होने और सप्लाई सामान्य होने से तेल की कीमतों पर दबाव घटा है।

हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम है। ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि तेल विपणन कंपनियां पहले ऊंची कीमतों के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करेंगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव लंबे समय तक स्थिर रहते हैं, तभी खुदरा ईंधन की कीमतों में कटौती संभव है। कई विश्लेषकों का अनुमान है कि उपभोक्ताओं को दशहरे के आसपास राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल के भाव से तय नहीं होतीं।

इनमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन, डॉलर-रुपया विनिमय दर, टैक्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर घरेलू कीमतों पर कुछ समय बाद दिखाई देता है।

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति बनी रहती है और कच्चा तेल 70–75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में स्थिर रहता है, तो आने वाले महीनों में ईंधन की कीमतों में राहत मिलने की संभावना मजबूत हो सकती है। फिलहाल उपभोक्ताओं को तेल कंपनियों और सरकार के अगले फैसलों का इंतजार करना होगा।

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