RBI का अनुमान- इस साल महंगाई बढ़ेगी, GDP ग्रोथ घटाकर 6.6% की; रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपनी जून 2026 की बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है।
इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि (GDP Growth) का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है। वहीं महंगाई (Inflation) के बढ़ने की आशंका जताते हुए मुद्रास्फीति के अनुमान को भी बढ़ाया गया है।
RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, रुपये पर दबाव और कमजोर मानसून की आशंका अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। इन्हीं कारणों से केंद्रीय बैंक ने विकास दर के अनुमान में कटौती की है और महंगाई को लेकर सतर्क रुख अपनाया है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI Inflation) का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया है, जो पहले 4.6% था। केंद्रीय बैंक का मानना है कि तेल की ऊंची कीमतें, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और मौसम संबंधी जोखिम आने वाले महीनों में महंगाई को प्रभावित कर सकते हैं।
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। इससे करोड़ों ग्राहकों की EMI पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि भविष्य में महंगाई बढ़ने पर RBI की नीति में बदलाव संभव है
RBI के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी पूंजी के बहिर्गमन और मानसून से जुड़े जोखिम आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने विकास दर का अनुमान घटाया और महंगाई के अनुमान को बढ़ाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि RBI ने फिलहाल संतुलित रुख अपनाया है। एक तरफ महंगाई का दबाव है तो दूसरी ओर आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखना भी जरूरी है। ऐसे में रेपो रेट को स्थिर रखना बाजार और उद्योग जगत के लिए राहत भरा फैसला माना जा रहा है।
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