मेडिकल कॉलेज के 24 नर्सिंगकर्मी और लैब टेक्निशियन को नौकरी से हटाया, रात 9 बजे वॉट्सएप पर भेजा मैसेज
राजस्थान के एक मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 24 नर्सिंगकर्मियों और लैब टेक्निशियनों को अचानक नौकरी से हटाने का मामला सामने आया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे उन्हें वॉट्सएप पर संदेश भेजकर सूचित किया गया कि अब उन्हें अगले दिन से ड्यूटी पर आने की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले के बाद कर्मचारियों में नाराजगी और चिंता का माहौल है।
बताया जा रहा है कि हटाए गए कर्मचारी पिछले लंबे समय से संविदा आधार पर मेडिकल कॉलेज और उससे जुड़े अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। कर्मचारियों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या कारण बताए अचानक सेवा समाप्त कर दी गई। वॉट्सएप पर भेजे गए संदेश में केवल इतना लिखा गया कि “कल से आने की जरूरत नहीं है।”
नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कोविड काल सहित विभिन्न कठिन परिस्थितियों में भी लगातार सेवाएं दीं, लेकिन अब अचानक उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कई कर्मचारियों ने कहा कि उनके परिवार की आजीविका इसी नौकरी पर निर्भर है और इस फैसले से वे आर्थिक संकट में आ गए हैं।
कर्मचारियों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से निर्णय वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की भर्ती प्रक्रिया या ठेका व्यवस्था में बदलाव किया गया है तो भी कर्मचारियों को उचित नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था का अवसर मिलना चाहिए था। कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारी संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए संविदा कर्मचारियों के साथ हुए व्यवहार को अनुचित बताया है।
उनका कहना है कि वर्षों से सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को एक मैसेज के जरिए हटाना मानवीय और प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।
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