कृषि विभाग चलाएगा ‘खेत बचाओ अभियान’, यूरिया-डीएपी पर निर्भरता घटाने और जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करने और मिट्टी की उर्वरता को बचाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू करने की घोषणा की है।
अभियान के तहत किसानों को यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने तथा जैविक और प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार और असंतुलित मात्रा में रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इससे भूमि की उर्वरता घटने के साथ उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। इसी को देखते हुए अभियान के दौरान किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, जैविक खाद, हरी खाद और बायो-फर्टिलाइजर के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी।
अभियान के तहत गांव-गांव किसान गोष्ठियां, प्रशिक्षण शिविर, खेत प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और कृषि विश्वविद्यालय मिलकर किसानों को टिकाऊ खेती के तरीकों से परिचित कराएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि इससे मिट्टी की सेहत बेहतर होगी और किसानों की उत्पादन लागत में भी कमी आएगी।
राजस्थान में भी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य सरकार की परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत किसानों को जैविक खेती अपनाने, वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना और जैव उर्वरकों के उपयोग के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
कृषि विभाग का मानना है कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल मिट्टी की उर्वरता बचाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों को टिकाऊ और लाभकारी खेती की दिशा में भी आगे बढ़ाएगा। विभाग ने किसानों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
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