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पेट्रोल-डीजल ड्यूटी कटौती से सरकार को ₹1 लाख करोड़ का घाटा, वित्त मंत्री बोलीं—“नकारात्मक माहौल बनाना गलत”

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में संभावित कटौती या राहत उपायों को लेकर बड़ा वित्तीय अनुमान सामने रखा है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा कि अगर ईंधन पर ड्यूटी घटाई जाती है तो सरकार को करीब ₹1 लाख करोड़ तक के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

वित्त मंत्री ने इस दौरान कहा कि देश की आर्थिक ग्रोथ और स्थिरता को लेकर “नकारात्मक माहौल बनाना सही नहीं है” और सरकार का ध्यान महंगाई नियंत्रण के साथ-साथ राजकोषीय संतुलन बनाए रखने पर है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार पहले से ही ईंधन, खाद और खाद्य सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पेट्रोल-डीजल पर टैक्स या ड्यूटी में किसी भी बड़ी कटौती से केंद्र और राज्यों की आमदनी पर सीधा असर पड़ता है। यह राजस्व मुख्य रूप से सड़क, रेलवे, और कल्याणकारी योजनाओं के लिए उपयोग किया जाता है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए एक चुनौती बना हुआ है। हाल के समय में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला है।

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य जनता को महंगाई से राहत देना है, लेकिन साथ ही देश की आर्थिक स्थिरता और विकास योजनाओं को प्रभावित होने से बचाना भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बिना सोच-समझकर टैक्स कटौती से दीर्घकालिक आर्थिक नुकसान हो सकता है, जिसका असर विकास परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं पर पड़ेगा।

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